Feb 1, 2021 · कविता
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*कुछ ख़त मोहब्बत के*

कुछ ख़त मोहब्बत के, बख़्शे में आज मिले !
पढ़कर उनको दिल में, आज भी फूल खिले !!
वो याद मोहब्बत की, हो आई फिर से ताजा !
जब प्यार महोब्बत के, वो चले थे सिलसिले !!

मिले थे जब हम पहली बार वो हर बात नूरानी है !
ये ख़त मोहब्बत के तेरे मेरे प्यार की निशानी है !!
बसती ख़ुशबू प्यार की इनमें मौजों की रवानी है !
कैसे भूल जाऊं उन लम्हों को तेरी मेरी कहानी है !!

पहली बार ही साथी हम तुम मिले थे उस रोज !
फिर डूबे हैं उन यादों में था तुमने किया प्रपोज !!
पहली नज़र के प्यार को था दिल ने समझ लिया !
मानो जन्मों जन्म की जैसे पूरी हो गई हो खोज !!

नीलम घनघस ढांडा
चंडीगढ़ , हरियाणा

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Neelam Chaudhary
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*Writer* & *Wellness Coach* ---------------------------------------------------- मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी... View full profile
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