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कुछ है जो…

Dinesh Sharma

Dinesh Sharma

कविता

August 30, 2016

कुछ है जो घूरते है
आँखों में छिपी काली आँखों से,
आँखों में शर्म नहीं
बहाते है पानी
आँसू नही
कुछ है जो घूरते है
आँखों में छिपी काली आँखों से,
अब तो इस कदर बढ़ी है बेशर्मी
लालच की,
आँखों का काला छिपाये
काला चश्मा चढ़ाय
उंगली उठाये घूमते है
शरीफो की बस्ती में,
कुछ है जो घूरते है….

^^^^^^दिनेश शर्मा^^^^^^

Author
Dinesh Sharma
सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।
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