Skip to content

कुछ सोच रहा हूँ मैं…..

प्रतापसिंह ठाकुर(राणा)

प्रतापसिंह ठाकुर(राणा)

कविता

February 11, 2018

कुछ सोच रहा हूँ मैं
पर क्या सोच रहा हूँ मैं?
सही सोच रहा हूँ…या गलत
पर कुछ सोच रहा हूँ मैं….
सोचने के बाद क्या, जो सोचा है वह कर पाऊंगा
यह भी सोच रहा हूँ मैं….
करने का तो सोच लिया पर होगा क्या अंजाम
सोच रहा हूँ मैं…
सोच रहा हूँ जा के कह दूँ रूबरू
क्या कहूंगा? कैसे कहूँगा?
सोच रहा हूँ मैं…..
अब कह दिया जो कहना था…
वो क्या कहेगी सोच रहा हूँ मैं…..
रात बीत रही है सोचते सोचते
कल कब होगी सोच रहा हूँ मैं…
यूँ ही सोचता रहूँगा तो हो गया काम
इस सोचने को बंद करने के लिए
कुछ सोच रहा हूँ मैं…..

Share this:
Author
प्रतापसिंह ठाकुर(राणा)
From: सनावद
अध्यापक(विज्ञान ) मध्यप्रदेश
Recommended for you