Oct 6, 2016 · कविता

कुछ वक्त साथ ले आउँ !!

फुर्सत हो तो मैं आउँ
कहो तो कुछ वक्त साथ ले आउँ
तुम्हे वक्त नही है जमाने से
मुझे फुर्सत नही
तेरी यादों की झडी़ लगाने से
तुम कहते हो तुमने वक्त से जंग छेड़ी है
तुम भागना चाहते हो … पकड़ना चाहते हो
वक्त को अपनी आगे झुकाना चाहते हो
पर देखो ..वक्त तो तुमसे जंग मे कब का हार चुका है
तुम कितने आगे आ गए
वक्त कब का पिछड़ चुका है!!!!!!!
वक्त की आड़ मे कितना कुछ खो रहे हो
संस्कारो और दायित्वों से मुहँ मोड़ रहे हो
कही ऐसा न हो ..
कि आज तुम कहते हो ..वक्त नही मिलता
कल ये कहो वक्त नही गुजरता ..
वक्त नही कटता…

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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे...
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