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कुछ मुक्तक – तेरे लिये

Govind Kurmi

Govind Kurmi

मुक्तक

April 2, 2017

१-
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सोचूं तेरे लिये ऐसे भी सवेरे हों
आंखों में तेरी सपने कुछ मेरे हों
लाखों सजदे हजारों मन्नतें तेरे लिये
हकीकत ना सही सपनों में हम तेरे हों
??????????

२-
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गर नामंजूर हो तुमको तो दूर चले जायेंगें
इक इशारा कर देना सारी दुनिया छोड़ जायेंगें
जिक्र आये जुबां पर कभी इस पागल दीवाने का
तुम छत पे चली आना हम तारों में नजर आयेंगे
??????????

Author
Govind Kurmi
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।
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