कुछ बात बने।

यूँ तो हमदर्द हजारों है,कोई अपना मिल जाए तो बात बने।
यह दुनियाँ तमाशबीनों की बस्ती है,कोई अपना दिख जाए तो बात बने।।
कहते है खुदगर्ज़ मुझे,जमाने भर के लोग।
उनको कभी आईना दिख जाये तो बात बने।।
हादसोँ की आवाजाही में कन्धे पर हाथ बहुत मिल जायेंगे।
मैं जिस पर सर रख दू,वो कन्धा मिल जाये तो बात बने।।
जिनका काम है बस औरों में कमियाँ निकालना,
उनको कोई काम धन्धा मिल जाये तो बात बने।।
शय,और मात तो दस्तूर है दुनिया का।
इस दरमियां इक पल सुकून का मिल जाये तो बात बने।।

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