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कुछ परिभाषाएँ…!

mahesh jain jyoti

mahesh jain jyoti

कविता

January 29, 2017

कसम
—-
बातों की श्रंखला में
विश्वास की चेष्टा
और झूँठ की पराकाष्ठा को
‘कसम’ कहते हैं ।

कदम
—-
समीप से सुदूर तक
सुदूर से समीप तक
जाने और आने के माप को
‘कदम’ कहते हैं ।

करम
—-
कल और कल के
मध्य में भटकते
आज के भूत और भविष्य को
‘करम’ कहते हैं ।

कलम
—-
अंकित कर लेती जो
बहकते विचारों को
उस भोजपत्र की प्रेमिका को
‘कलम कहते हैं ।
—-
– महेश जैन ‘ज्योति ‘

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Author
mahesh jain jyoti
"जीवन जैसे ज्योति जले " के भाव को मन में बसाये एक बंजारा सा हूँ जो सत्य की खोज में चला जा रहा है अपने लक्ष्य की ओर , गीत गाते हुए, कविता कहते और छंद की उपासना करते हुए... Read more
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