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कुछ दोहे

हेमा तिवारी भट्ट

हेमा तिवारी भट्ट

दोहे

May 13, 2017

???कुछ दोहे???

एक जैसे भावों की,नकल टीपतेे लोग|
फेसबुकी कविता हुई,ज्यों संक्रामक रोग||1||

निराला औ’ दिनकर सी,ढूँढ़ कलम मत आज|
अंगूठे से लिख रहा,ज्ञानी हुआ समाज||2||

तुलसी सूर कबीर हों,सबकी कहाँ बिसात|
करें कठिन बस साधना,हृदय लिये जज्बात||3||

रमा रजिया संग करें,हँसी खुशी हर काम|
कौन हँसी की जात है,क्या मजहब का नाम||4|

चोट लगे दूँ रोय मैं,तू भी तो दे रोय|
अन्तर बोलो है कहाँ,समझाये तो कोय||5||

उजले रंग औ’ मन का,ग्राहक सब संसार|
स्नेह भाव हिय में रखो,चोखा यह व्यापार||6|३

‘रा’ द्योतक है अग्नि का,’म’ शीतल वारि धाम|
अगर संतुलन चाहिए,जपिए निशदिन राम||7||

राम नाम पूंजी बड़ी,रखो इसे संभाल|
केवल जपो न राम को,लो जीवन में ढाल||8||

✍हेमा तिवारी भट्ट✍

Author
हेमा तिवारी भट्ट
लिखना,पढ़ना और पढ़ाना अच्छा लगता है, खुद से खुद का ही बतियाना अच्छा लगता है, राग,द्वेष न घृृणा,कपट हो मानव के मन में , दिल में ऐसे ख्वाब सजाना अच्छा लगता है
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