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कुछ दोहे

Laxminarayan Gupta

Laxminarayan Gupta

दोहे

February 27, 2017

कविता किरकी कांच जस, हर किरके को मोह ।
छपने की लोकेषणा, करे छंद से द्रोह ।

आत्म मुग्ध लेखन हुआ, पकड़ विदेशी छंद ।
ताका, महिया, हाइकू, निरस विदेशी कंद ।

पुलिस, कोर्ट. लोकल निगम, कर्म क्षेत्र बदनाम
बिना गांठ ढ़ीली किये, बनते वहाँ न काम ।

Author
Laxminarayan Gupta
मूलतः ग्वालियर का होने के कारण सम्पूर्ण शिक्षा वहीँ हुई| लेखापरीक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत होने के बाद साहित्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हुआ|
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