कुछ दोहे

घोर तमस संसार में,
भटक रहा इन्सान l
सबके अपने देखिये,
अलग-अलग भगवान l
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नई पौध के दौर में,
मर्यादा यों ढेर l
राह राम की तक रहे,
फिर शबरी के बेर l
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जब मैलापन दे रहा,
पहरा मन के द्वार l
रूप सलोना श्याम का,
कैसे हो साकार l
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नन्हीं मुनिया को मिला,
उसी जगत से त्रास l
जिसमें लोगों ने रखा,
नौ दिन का उपवास l
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मोह-पाश में फँस गया,
मांग रहा उद्धार l
मन के केवट को करो,
रघुवर नदिया पार l
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– राजीव ‘प्रखर’
मुरादाबाद (उ.प्र.)
मो. 8941912642

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