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कुछ तो है

राहत वसीम

राहत वसीम

कविता

April 18, 2017

ये कैसा रिश्ता है तेरा मेरा
तेरे ख्यालो में गुजरती है राते
तुझसे ही होता है सवेरा मेरा
तुझको देखु जब भी ⓞⓝⓛⓘⓝⓔ
दिल घबरा सा जाता है जब तू करता है मेरा мєѕѕαgє ѕιgи
हर वक़्त देखु तेरा ḶḀSṮ SḕḕṆ
इसी ख्याल में गुजर जाता है दिन
दिल से आवाज तो आती है
पर होंठ बयां नही कर पाती है
आंखों को सुकून मिलता है देख कर तेरा ? ?
उसपर तेरा ѕтαтυѕ बढ़ा देता है मेरा ? ?
गुस्से में ना किया कर मुझे *BLOCK*
दिल में आजा ~direct~ ना कर “`knock“`

βψ _ ” राहत”

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