गज़ल/गीतिका · Reading time: 2 minutes

कुछ तो बात हम में भी है

अरे होंगी हज़ार कमियाँ यार, कुछ तो बात हम में भी है।
सबको अपना कायल बना दें, ये करामात हम में भी है।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

भले एक सूनापन सा दिखाई देता हो,
अमावस की अपनी बात होती है,
वैसे सितारों से सजी एक मुकम्मल कायनात हम में भी है।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

जिस्म से रूह तक अंगारों से छलनी हैं,
कितने ही दुखों से डूब कर गुज़रे हैं,
ख़ुशी से जीते हैं जीवन को, सपनों की बारात हम में भी है।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

दुखों को पास से समझा है इसलिए,
खुशियों की कीमत पता चल गयी,
रोते को हंसाने के लिए, खुशियों की सौगात हम में भी है।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

टेड़ी-मेडी उलटी-सीधी बातें करते हैं,
हंसी मज़ाक भी हम अच्छे से जानते हैं,
किसी का ग़म समझ सकें, इतने तो जज़्बात हम में भी हैं।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

सारा जीवन खुली किताब है अपनी,
सीधा सादा सुलझा सा जीवन है अपना,
जो कभी सुलझे नहीं ऐसे, कुछ सवालात हम में भी है।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

सालों साल जी तोड़ मेहनत की है,
जीवन भर समेटते रहे खुद को,
पल भर में बिखर जाएँ, ऐसे हालात हम में भी है।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

हालाँकि कमज़ोर पड़ते दिखाई दे रहे हैं,
जीवन की बाज़ी हारी हुई सी लगती है,
पर एक चाल में बाज़ी पलट दें, वो शह और मात हम में भी है।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

मन में जीवन का सारांश समेटे हैं,
भले उम्रदराज़ और बुजुर्गों सी बातें करते हैं,,
पर बच्चों सी मासूमियत और, कुछ खुराफात हम में भी हैं।
अरे होंगी हज़ार कमियाँ…..

————- शैंकी भाटिया
15/09/2015

61 Views
Like
52 Posts · 10.2k Views
You may also like:
Loading...