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कुछ तो कर

कुछ कर जा ऐसा
कि मान जाए दुनियाँ
काबिलियत तेरी
कुछ बन जा ऐसा
कि हो जाए दुनियाँ
नतमस्तक आगे तेरे
कुछ दिखा जलवा ऐसा की
आँखें खुली की खुली रह जाएं
देखने वालों की
छा जा तू ऐसे
कि तेरे चले जाने के बाद
दुनियाँ शिद्दत से ढूंढे
तेरे अवशेषों को
औ’ नम आंखों से सींचे
तेरी कब्र को।
🖋️अटल©

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अटल चौबे
अटल चौबे
घोरावल, सोनभद्र (उ.प्र.)
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Awards: "अटल" नाम ही, है पहचान मेरी।
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