23.7k Members 50k Posts
Coming Soon: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता

कुछ तो कर गुजरने का.....

Jun 27, 2016

?
कुछ तो कर गुजरने का
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
कुछ तो कर गुजरने का
हवा पैगाम लाया है ।
सच की हर हया की
अम्न का तहजीब लाया है ।।

है छा रहा बादल हरे
आकाश को ढकने लगा ।
हैवानियत भी बन कहर
अब बून्द सी बनने लगी ।।
अब तो आशियाँ में एक
दिशा वाजिब लाया है ।
कुछ तो कर गुजरने का……………..

एक को हक़ और दूजे
को नहीं मिलता ।
क्यों नहीं जो एक को
सबको वही मिलता ।।
अब तो धूर्त के गर्दन का
एक परिमाप लाया है ।
कुछ तो कर गुजरने का………………

रौशनी जबतक नहीं
होता तभी तक है तिमिर ।
मौन जबतक “सामरिक” है
ये व्यवस्था है बधिर ।।
अब तो हर तिमिर का
तोड़ सत का दीप आया है ।
कुछ तो कर गुजरने का…………….


सामरिक अरुण
3 जून 2016

7 Views
Arun Kumar
Arun Kumar
18 Posts · 297 Views
अहम् ब्रह्मास्मि
You may also like: