कुछ इस कदर से दिल में समाने लगे

वो कुछ इस कदर से इस दिल में समाने लगे,
दूर होकर भी हौले – हौले से पास आने लगे।
ना जाने कहाँ खो गईँ वो तन्हाईयाँ, वो उदासी मेरी,
था अकेला जब तक, थीं खुशियां भी दासी मेरी।
हर खत जलाया, मिटायीँ हर निशानियाँ उसकी,
जो दिल में थीं, मिटायीँ हर कहानियां उसकी।
वो मेरी रूह में, हर सांस में समाने लगे,
मैं जितना भूलता गया, वो उतना ही याद आने लगे।
वो कुछ इस कदर से इस दिल में समाने लगे,
दूर होकर भी हौले – हौले से पास आने लगे।

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अपने माता पिता के अरमानों की छवि हूँ मैं, अँधेरों को चीर कर आगे बढ़ने...
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