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=*= कुछ अच्छा हो जाए =*=

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 15, 2017

तकलीफों से न तू सबक ले,
जो न करे गुरूर को नष्ट।
अहंकार का जोश दिख रहा,
हो रहा है तू क्यों पथ-भ्रष्ट।
जो तू आज कर रहा प्राणी,
खुशी है कुछ पल की, हे धृष्ट।
इनकी परिणति कैसी होगी,
तुझे आभास नहीं है दुष्ट।
जैसी करनी वैसी भरनी,
बुरे कर्म का फल है कष्ट।
ऊपर वाला न्याय है करता,
उस से बचा न कोई निकृष्ट।
आज नहीं तो कल तो होगा,
तेरा यह खेल नष्ट-भ्रष्ट।
इसीलिये कहते हैं प्राणी,
कर ले कुछ-कुछ तो उत्कृष्ट।
कुछ-कुछ छवि सुधार ले अपनी,
कि ऊपर वाला भी हो आकृष्ट।

—-रंजना माथुर दिनांक 06/03/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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