कुंडलिया

पुलवामा दर्द सहा आसूं लेकर नैन,
क्रोध दिल में दिया दबा मिला न फिर भी चैन।
मिला न फिर भी चैन तुम ऐसा करो इलाज,
घरों में घुस ठोको तब ये आयेंगे बाज।
कह अशोक कविराय बान्धिये इनका सामां,
स्वप्न में भी कभी फिर न सोचें पुलवामा।।

अशोक छाबडा

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