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कुंडलिया… प्रीतम कृत

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

September 24, 2017

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कुंडलिया-1
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मित्रता कृष्ण-सुदामा-सी,मन-भेद पता चले।
भू-नभ का अंतर होय,हँस लगा गले मिले।।
हँस लगा गले मिले,दोस्ती कुबेर-खजाना।
जिसको ये मिला है,मिला प्रभु का नजराना।
सुन प्रीतम की बात,दोस्ती कर नहिं धूर्तता।
स्वर्ग कदमों में हो, हो गर सच्ची मित्रता।
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कुंडलिया-2
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जिन्दगी ने दिए हमें, हालात ना भूले।
हर बात है याद हमें,हम बात ना भूले।।
हम बात ना भूले,मुलाकात नहीं भूले।
जिसने भी की वफा,यार साथ नहीं भूले।
सुन प्रीतम की बात,याद रखो सदा बंदगी।
हाथ पकड़ न छोडो,कालचक्र है जिन्दगी।
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कुंडलिया-3
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उलझन में नहीं उलझो,हल का हुनर सीखो।
अँधेरे में दीप जला,यार आँख न मीचो।।
यार आँख न मीचो,कोशिशें नाकाम न हों।
हैं कौन-सी चीजें,जिनके यहाँ दाम न हों।
सुन प्रीतम की बात,मायूसी नहीं सुलझन।
विवेक से पग बढा,होंगी दूर सब उलझन।
*********राधेयश्याम बंगालिया
प्रीतम कृत*****************

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