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कुंडलिया छंद…..सोच-क़िताबें- प्यार…..

Radhey shyam Pritam

Radhey shyam Pritam

कुण्डलिया

November 12, 2017

“सोच”
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सोच अच्छी रखना तुम,जीवन सुंदर बने।
सूरत सीरत नेक हो,प्यार समंदर बने।।
प्यार समंदर बने,सब हँस गले मिलें सदा।
तारीफ़ कर न थकें,रिश्तें हों सब ही फ़िदा।
सुन प्रीतम की बात,दिल में रखना तुम लोच।
आप भला जग भला,ऐसी हो भैया सोच।
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“क़िताबें”
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सफलता का बड़ा ताज,पहनाती क़िताबें।
फ़र्श से अर्श दिखाती,निखारती क़िताबें।।
निखारती क़िताबें, इनका कोई सानी न।
जीवन में जगह है,तो एक परेशानी न।
सुन प्रीतम की बात,ज़ादू बहुत है चलता।
मान कर क़िताब का,प्राप्त कर बड़ी सफलता।
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“प्यार”
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प्यार देखा परखा पर,मिला न कभी यारा।
बेवफ़ाई सदा मिली,किसे समझूँ प्यारा।।
किसे समझूँ प्यारा,सभी बिच्छू लगते हैं।
मौका मिले तब तो,डसने से न बचते हैंं।
सुन प्रीतम की बात,संसार तलवार-धार।
घृणा लिए पैदा,मरते भी ले तकरार।
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“स्माग”
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घुटने लगा है दम अब,स्माग ज़हर सम हुआ।
साँस जलन हादसे दे,स्माग क़हर सम हुआ।।
स्माग क़हर सम हुआ,जागें सरकार किसान।
सटीक हल निकालें,जनता न हो परेशान।
सुन प्रीतम की बात,ख़त्म करना ये सिटने।
सोच विचार करना, स्माग टिकाय ले घुटने।
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राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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