कुंडलिया-कैसे जीवन हो ख़ुशहाल

सदा कार्य की दाद दो,जलन करो ना भूल।
फूलों बदले फूल हैं,शूलों बदले शूल।।
शूलों बदले शूल,
रखो याद ये हमेशा।
जीवन हो ख़ुशहाल,
रहे न संकट कलेशा।
सुन प्रीतम की बात,सबसे बनिए तुम ज़ुदा।
सबसे हो पहचान,प्यार रहे आँगन सदा।

जीवित मुर्दा एक वो
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भागे डरकर हार जो,अपना रोना रोय।
जीवित मुर्दा एक वो,बचा सके ना कोय।।
बचा सके ना कोय,
परिस्थितियों को जीतो।
लड़ो ग़मों से ख़ूब,
कायर-से नहीं बीतो।
सुन प्रीतम की बात,हौंसले से सब जागे।
बढ़ो धैर्य से मीत, तूफ़ान भी डर भागे।

बात बीती सो बीती
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बीती बातें भूल के,चुनो ख़ुशियाँ हज़ार।
नववर्ष बने आपका,मंगल का आधार।।
मंगल का आधार,
मज़े में झूमो यारों।
तनाव छोड़ो आज,
नवचेतन से विचारो।
सुन प्रीतम की बात,उसकी आरज़ू जीती।
जो चलता यह सोच,बात बीती सो बीती।

भूलो ना औक़ात रे!
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भूलो ना औक़ात रे,बड़े बोल ना बोल।
धूप-छाँव ज़िन्दगी,देगी पर्दा खोल।।
देगी पर्दा खोल,
वक़्त का पहिया घूमे।
चाहे हो बलवान,
क़दम इसके है चूमे।
सुन प्रीतम की बात,ख़ुशी का झूला झूलो।
रखो सदा ये याद,औक़ात तुम ना भूलो।

राधेय श्याम बंगालिया “प्रीतम”
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