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की_तुम_अपने_घर_मे_रहो..

ज़रा सा दूर मगर अपनो की नज़र मे रहो,
मेरी इल्तिजा है तुमसे की तुम अपने घर मे रहो..

बड़ा मुश्किल है क़ैद कर पाना खुदको,
मगर परों पर नही तुम अपने पैरो पर रहो..

ये एक जंग है जिसे लड़ना है सबको मिलकर,
ये तुम्हारी लड़ाई है की तुम अपने घर मे रहो..

हुकुमत का ऐलान है की आशियाना-ए-शज़र मे रहो,
ये तुम्हारी वतनपरस्ती है की तुम अपने घर मे रहो..

(ज़ैद_बलियावी)

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ज़ैद बलियावी
ज़ैद बलियावी
बेल्थरा रोड, बलिया (उत्तर प्रदेश)
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तुम्हारी यादो की एक डायरी लिखी है मैंने...! जिसके हर पन्ने पर शायरी लिखी है...
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