कीचक वध:आज नशे मै शलैन्द्री

महाभारत: कीचक वध

टेक = आज नशे मैं शैलैन्द्री मनै बङी दिखाई दे ।
खम्बे जैसी बला धरण मैं पङी दिखाई दे ।

( 1 ) रुप तेरा खिलरा अजब कमाल, डटै नही डाटी दिल की झाल ।

तोङ = लखन लाल की ढाल संजीवन जङी दिखाई दे ।
खम्बे जैसी बला धरण मैं पङी दिखाई दे ।

( 2 ) ऐसी लगी कालजै चोट , मनै इब लई जिगर मैं ओट ।

तोङ = बिना खता बे खोट नजर क्यूं कङी दिखाई दे ।
खम्बे जैसी बला धरण मैं पङी दिखाई दे ।

( 3 ) गात सैं भिङा हाथ चकराया , रोष मैं भरी कीचक की काया ।

तोङ = सारा माल डकराया काटता लङी दिखाई दे ।
खम्बे जैसी बला धरण मैं पङी दिखाई दे ।

( 4 ) बीतजा वक्त हाथ नहीं आवै , कहै नन्दलाल फेर पछतावै ।

तोङ = जब आके काल दबावै ना टलती घङी दिखाई दे ।
खम्बे जैसी बला धरण मैं पङी दिखाई दे ।

कवि: श्री नंदलाल शर्मा
टाईपकर्ता: दीपक शर्मा

1 Like · 231 Views
Copy link to share
पंडित नंदलाल शर्मा,पात्थरवाली,हरियाणा के महान गंधर्व कवि हुए हैं। तत्काल रचना बनाना अौर श्रोताओं को... View full profile
You may also like: