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किस्सा--द्रौपदी स्वयंवर अनुक्रमांक--07(दौड़)

***जय हो श्री कृष्ण भगवान की***
***जय हो श्री नंदलाल जी की***

किस्सा–द्रौपदी स्वयंवर
अनुक्रमांक–07(दौड़)

दौड़–
बोल्या राजा वाणी ताजा दिया मुलाहजा परै हटा,
हे नाथ गई बिगड़ बात दिन रात गात लिया दुख नै खा,
एक ठोड़ खङ्या हाथ जोड़ तुम मेरी ओर नै करो निंगाह,
महाराज आज रख लियो लाज गई अटक जहाज तुम ऊबार दियो,
थारा सहारा बंसीवारा कर धारा से पार दियो,
जन को जान अनजान अधर्मी परले पार निस्तार दियो,
संकट विकट कर दया दीन पै,आकैं सिर पुचकार दियो,
श्री कृष्ण बोले सुणो भूप तूं सलाह मान एक म्हारी,
सोळाह दिन तो बीत गए रै ना गई मीन उतारी,
सोळाह दिन बीत गए लड़की रह गई कुँवारी,
जै तनै लड़की ब्याहणी सै तो सुणता जाईये ध्यान लगा,
दो नए महात्मा तेरी झीरी मैं उनको तूं लेणा बुलवा,
मेरे हाथ तैं चिट्ठी लिख दयुं कागज कलम दवात मंगा,
राजा नेै क्या काम किया अपना रथ दिन्हा सजवा,
श्री कृष्ण फिर पाती लिखता कागज कलम दवात उठा,
सिद्ध श्री सर्वज्ञ उपमा लिख दी थी चिट्ठी के म्हां,
इस राजा नै देखो भाई लड़की का रच राख्या ब्याह,
दसुं दिशा के भूप बुलाये किसी से काम बण्या कोन्या,
कुटम्ब कबीला सारा थारा दुर्योधन भी पहुंच्या आ,
थारै हाथ तै विजय बणैगी पार्थ सुणले ध्यान लगा,
गुप्त भेष मै आणा अर्जुन लेणा अपना रूप छिपा,
लिखकर नै पाती जब नौकर को दिन्ही पकड़ा,
जा हलकारा हुकम करारा प्यारा देख डरै कोन्या,
आज्ञा पाकर चाल्या जाकर जा पहुंचा वन के म्हां,
हलकारा जब चाल पङ्या था वन के अन्दर ध्याया,
जाकर कै नै देखण लाग्या संत महात्मा पाया,
हाथ जोड़ प्रणाम करी चरणों मै शीश झुकाया,
ऋषियों कै अगाड़ी जब कहण लग्या हलकारा,
दो नए आ रहे संत उनका बता दयो द्वारा,
उनसे कुछ गुप्ती काम आज है हमारा,
ऋषियों नै अर्जुन की तरफ किया था इशारा,
एक तरफ नै अर्जुन बैठ्या धूणी पाँच जगा राखी,
काम क्रोध अंहकार मारके माया दूर भगा राखी,
दफै दूसरी भीमसेन नै ताड़ पाड़ सुलगा राखी,
चाल पङ्या हलकारा जब अर्जुन कै गया था पास,
जा करकै नै कहण लाग्या मै हूंं थारे चरण का दास,
श्री कृष्ण नै चिट्ठी भेजी बात का करीयो विश्वास,
लेकैं पाती ला ली छाती राम संघाती करै सहा,
खोल लिफाफा बाचण लाग्या चिट्ठी पढ़ै प्रीति ला,
भीमसेन की नजर घूमगी देखो काम बणै था क्या,
भीमसेन जब कहण लगया था अर्जुन नै सुणा सुणा,
गुप्ती पाती भाई तूं तळै तळै रह्या किसी मंगा,
बोलै कोन्या मींट लागरी,ज्युं चूनै मै ईंट लागरी,
हल्दी कैसी छींट लागरी,लग्न लियाया नाई,
दिल बीच उमंग दिखै सै,मनै होता जंग दिखै सै,
ऐसा ढंग दिखै सै,जाणु मंड रहे हों ब्याह सगाई,
भीमसेन जब पुछण लाग्या पाती कहाँ से आई,
अर्जुन भेद बतावण लाग्या,पास बैठा समझावण लाग्या,
सारा भ्रम मिटावण लाग्या,सुणता जाईये ध्यान लगा,
पांचाल देश के राजा नै लड़की का रच राख्या ब्याह,
कुटम्ब कबीला सारा अपणा दुर्योधन भी पंहुच्या आ,
श्री कृष्ण नै याद किया कहो आपकी कौण सलाह,
दुर्योधन का नाम सुणा जब आग लगी काया के म्हां,
काँटे की तरीयाँ खटकै सै दुश्मन मेरे जिगर के म्हां,
लक्षाग्रह मैं देख बसा कैं दुश्मन हमको रह्या जळा,
भीमसेन जब कहण लग्या क्युं राखी सै देर लगा,
तूं तो पीछै आ जाइये मनै तो कहदे पहलम जा,
जितने राजा यज्ञशाला के अन्दर कट्ठे हो रे सैं आ,
सारां का मै काम बणा दूं बाकि एक बचैगा ना,
अर्जुन बोल्या भीमसेन तेरै क्युं चढ़री सै बावळ,
सनै सनै सब काम बणैंगें क्यों करता है तावळ,
भीम कहै रै ब्याह मंडरया थ्यांवैं बूरा चावळ,
अर्जुन जब कहण लग्या था साफ आपको रह्या बता,
इन संतों की आज्ञा लेकर यज्ञशाला मै चालां ध्याय,
अर्जुन जब चाल पड्या था देर जरा सी लाई ना,
उन संतों के पैरों मै बार बार रह्या शीश झुका,
एक बार मुख से कहदयो तुम क्युं राखी सै देर लगा,
म्हारै हाथ तैं विजय बणै हाम लड़की नै लेंगें ब्याह,
भीमसेन खङ्या पीछै जलती राखी ताड़ उठा,
अर्जुन नै जब कहण लग्या भीमसेन ये सुणा सुणा,
रै अर्जुन तूं बहोत बावळा मोड्यां के पकड़ै सै पां,
आगै देख लड़ाई होगी ये के देंगें साहरा ला,
धोक मारै तो मार ताड़ की पां पै पर्चा देगी या,
सब तैं मोटा मेरा देवता वक्त पड़े पै लिए आजमा,
अर्जुन बोल्या भीमसेन तनै नहीं बात का बेरा,
आँख मींच कैं चालै सै रस्ते मै खुद रह्या झेरा,
जाणबूझ कैं क्युं करता है दीवै तळै अंधेरा,
संतमहात्मा शुद्ध आत्मा मुख से देंगें जबां हिला,
वो ऐ काम बणैगा भाई उसमै फर्क पड़ैगा ना,
सतं महात्मा कहण लगे थे क्युं राखी सै देर लगा,
दोनूं भाई जाओ नै तुम लड़की नै ल्योगे ब्याह,
दोनूं भाई चाल पङ्या यज्ञशाला मै आया,
जा करकै देखण लाग्या राजा बैठ्या पाया,
कई कई तो देख कैं जब भीम नै घबराया,
कई कई न्यूं कह रहे थे इबकै कटग्या चाळा देखो,
तावळ करकैं चालो भाई आग्या सै लठ आळा देखो,
कोय कोय कहण लग्या था मोडै का त्योर कुढ़ाळा देखो,मारैगा जरुर आग्या एक आधै का गाळा देखो,कहते केशोराम रटो परमेश्वर की माळा देखो।

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गंधर्व लोक कवि पंडित नंदलाल शर्मा
गंधर्व लोक कवि पंडित नंदलाल शर्मा
पात्थरवाली,भिवानी,हरि.
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पंडित नंदलाल शर्मा,पात्थरवाली,हरियाणा के महान गंधर्व कवि हुए हैं। तत्काल रचना बनाना अौर श्रोताओं को...