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किस्सा—चंद्रहास अनुक्रम–4

गंधर्व लोक कवि श्री नंदलाल शर्मा

गंधर्व लोक कवि श्री नंदलाल शर्मा

कविता

January 18, 2017

***जय हो श्री कृष्ण भगवान की***
***जय हो श्री नंदलाल जी की***

किस्सा—चंद्रहास

अनुक्रम–4

वार्ता–कुंतलपुर में रहते हुए धाय माता को तीन साल हो जाते हैं।लड़का चंद्रहास भी तीन साल का हो जाता है।एक रोज जब लड़का बाहर से खेल के आता है तो देखता है कि धाय माता बेहोश अवस्था में पड़ी है तो वो अपनी माँ से ना बोलने का कारण पुछता है……

टेक– एक बै बोलिए महतारी,तेरै होगी कोण बीमारी,आज माँ बेटे तैं न्यारी चाली पाट के।

१-पल पल हलचल मुश्किल दिल नै मोटा होया कबाड़ा री,
सोच फिकर सस्पंज रंज दुख मरणा भरणा ध्याड़ा री,
माड़ा भाग मैं लिखाया,माता क्यूँ दुनिया मै जाया,घर मै कैर जा लगाया आम काट के।

२-चंद्रमा सा गहण लग्या सिर चढ़ग्या केतू राहु री,
बणी बणी के सब कोए सिरी बिगड़ी मै कुण साहु री,
चाचा ताऊ नहीं भाई,कोय यारी ना असनाई,माड़ी करम मै लिखाई न्यारी छांट के।

३-माँ होले खड़ी पड़ी धरती मै कुणसी तेरै बीमारी री,
माँ नै बेटा प्यारा हो सै बेटे नै माँ प्यारी री,
म्हारी धीर कुण बंधावै,मेरा हीया भर भर आवै,नैया कंठारै लगावै दिल नै डाँट के।

दौड़–

चंद्रहास होकै उदास ले लंबे साँस रह्या त्रास दिखा,
जब बोल्या लड़का होकैं धड़का गड़बड़ का रही काम बणा,
माता माता कहण लग्या वो बोली बोल्य प्यारी,
न्युं तो मनै बता दे क्यूँ नाराज हुई महतारी,
फणी मणी और मछली जल से हो सकती ना न्यारी,

मात पिता नै बेटा बेटी प्यारे होया करै सैं,आंगलियां तै कोन्या कदै नूँ न्यारे होया करैं सै,
काठ बीच ठोकण नैं लोह के श्यारे होया करैं सैं,
डूबैंगें मझधारा अंदर धोखा करणे वाले,काग करंग पै राजी खर कुरड़ी पै चरणे वाले,शूरा शेर देर ना लावै सन्मुख मरणे वाले,बाळद भरणे वाले वे बंजारे होया करैं सैं,

बत्ती गैस चिराग तिमर मै शोभित चसे हुए,
संत महात्मा योगी जन इंद्री कसे हुए,
पूत कुपात्र कुटील नार घर खो दे बसे हुए,
गरदीश के मंह फसे हुए दुखियारे होया करैं सैं।

माता माता कहण लाग्या चंद्रहास जब धोरै जा,लड़के की जब सुण कैं वाणी,पाणी भरया नैन कै म्हां,रै बेटा चाला हो रह्या सै दो पांया नै नहीं जगहां।
मत बुढ़े की नार मरै और माँ मत मरीयो याणे की,
हे भगवान मिलै रेते मै वस्तु बड़े ठिकाणे की,
रक्षा वो करतार करैगा प्रजा का सरदार करैगा,
कुण बेटा तेरे प्यार करैगा कुण बुझैगा खाणे की,
मरगी माता जिसनै जाया के खेल्या के तूं खाया,आ तेरे लाड करूँ मेरी माया,फेर मेरी तैयारी जाणे की,
उल्टी बात जचण लागी,सिर पै कजा नचण लागी,इब मेरी जीभ खिचण लागी,शक्ति नहीं बतलाणे की,

पलपल हलचल मुश्किल होरी,दिल धरता ना धीर देखिये,
तेरा मेरा इस दुनिया मै इतने दिन का सीर देखिये,
जिनके मरज्यां लाल बादशाह,रूळते फिरैं वजीर देखीये,

हाथ जोड़ अस्तुती करती,धरती ध्यान चरण के म्हा,
हे भगवान दया करीयो तुम लड़के की करो सहा,
इतने मै के कारण हो गोला पड़्या गैब का आ,
यो पांच तत्व का बण्या पूतला जिसकै अंदर भरी हवा,
काल बली का चक्कर लाग्या हंस प्राणी होया विदा,
धाय माता भी मरगी थी वो लड़का रोया रूधन मचा,

नगरी के कहण लगे सेठ और साहुकार,
बहोत घणे दिन तै यहां बेवारस रह थी नार,
हो गया देहांत उसका ठाओ, मत लाओ बार,
शमशाणा मै लाकै उसका किया दाह संस्कार,
कहते केशोराम नाम लेणे से होता उद्धार,

४-खूटे ताण बाछड़ू कुद्दे पाट रह्या सै खूटा री,
बेगराज हो सही बही मै टेक्या जा सै गुठा री,
झूठा मोह ममता का जाल,तृष्णा करती बड़े कमाल,हो ना टाल लेख लिखे जो ललाट के।

कवि: श्री नंदलाल शर्मा जी के शिष्य श्री बेगराज जी
टाइपकर्ता: दीपक शर्मा
मार्गदर्शन कर्ता: गुरु जी श्री श्यामसुंदर शर्मा (पहाड़ी)

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