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किस्मत

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

September 3, 2017

हाथों की लकीरों की चित्रकारी में साथियों,
कुछ डालो मेहनत के रंग।
फिर जो अक्स उभरेगा भविष्य का
उसमें निखर कर आएगा,
तुम्हारी किस्मत का असली रूप रंग।
किस्मत की सुई में मेहनत का धागा।
यूं लगे जैसे सोने पे सुहागा।
किस्मत के भरोसे कभी मत सोना
न मिला कुछ कभी तो मत रोना।
कर्म सर्वोपरि है जीवन में
किस्मत को भी वह कभी-कभी
भर लेता अपने दामन में।

–रंजना माथुर दिनांक 28/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना )
copyright ©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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