Skip to content

किस्मत के दोहे

Archana Singh

Archana Singh

दोहे

June 16, 2016

मेरी किस्मत ले चली,अब जाने किस ओर।
प्रभु हाथों में सौप दी,यह जीवन की डोर।।

किस्मत में है क्या लिखा,नहीँ किसी को भान।
निरर्थक हैं विधा सभी,थोथा है सब ज्ञान।।

भाग्य-भाग्य का खेल है,इससे जीता कौन।
किस्मत नाच नचा रही,देख रहे सब मौन।।

अर्चना सिंह?

Author
Archana Singh
मैं छंदबद्ध रचनाऐं मुख्यतः दोहा,कुण्डलिया और मुक्तक विधा में लिखती हूँ, मुझे प्रकृति व मानव मन में उमड़ते भावों पर लिखना पसंद है......
Recommended Posts
किस्मत
1 इम्तिहान ले ज़िन्दगी ,करे पास या फेल किस्मत भी इसमें बड़ा, खेले अपना खेल 2 मिलना खोना सब भले , हो किस्मत के हाथ... Read more
क़िस्मत
कुछ बातें अनकही सी थी पर उनका समझना आसान था मेरे लिए ... लोगों ने ना ही सुना न समझा उस निशब्द को,न ही उसमें... Read more
मुक्तक (सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं)
रोता नहीं है कोई भी किसी और के लिए सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं प्यार की दौलत को कभी छोटा... Read more
क्या है किस्मत?
किस्मत क्या है, आख़िर क्या है किस्मत? बचपन से एक सवाल मन मे है, जिसका जबाब ढूंड रहा हूँ| बचपन मे पास होना या फेल... Read more