Jun 16, 2016 · दोहे

किस्मत के दोहे

मेरी किस्मत ले चली,अब जाने किस ओर।
प्रभु हाथों में सौप दी,यह जीवन की डोर।।

किस्मत में है क्या लिखा,नहीँ किसी को भान।
निरर्थक हैं विधा सभी,थोथा है सब ज्ञान।।

भाग्य-भाग्य का खेल है,इससे जीता कौन।
किस्मत नाच नचा रही,देख रहे सब मौन।।

अर्चना सिंह?

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मैं छंदबद्ध रचनाऐं मुख्यतः दोहा,कुण्डलिया और मुक्तक विधा में लिखती हूँ, मुझे प्रकृति व मानव...
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