गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

किस्मत का फूल ज़िन्दगी में खिल नहीं रहा

किस्मत का फूल ज़िन्दगी में खिल नहीं रहा
मेहनत का हमको इसलिये हासिल नहीं रहा

कहते हैं लोग प्यार में कुछ सोचते नहीं
पर दिल हमारा प्यार में गाफिल नहीं रहा

पत्थर बना दिया इसे हालात ने यहाँ
मासूम अब हमारा ही ये दिल नहीं रहा

खाता था कसमें दोस्ती की वो बड़ी बड़ी
लेकिन कभी भी दर्द में शामिल नहीं रहा

ये खेल वक़्त का या लकीरों का है यहां
जो चाहते थे वो ही हमें मिल नहीं रहा

हम ‘अर्चना’ चलते रहे मौजों के साथ ही
ऐसे सफर हमारा ये मुश्किल नहीं रहा

09-09-2017
डॉ अर्चना गुप्ता

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