किसी से खिला ना कर .......

……….गजल ………..

कोई नही है अपना , किसी से गिला ना कर
इस शहर में दिल लेकर ,किसी से मिला ना कर

गम को खुशी बनाकर , हंसी में उडा दे तू
अपने गमों का आम यूं, सिलसिला ना कर

दिल से जो काम लोगे, कयामत ही आयेगी
गुजरी कहानी लेकर , किसी से मिला ना कर

लोगो ने हुनर सीख लिया , हसाकर के रूलाना
यूं ….वक्त …वे ….वक्त , किसी से खिला ना कर

आँखों के समुन्द्र को , छलकनें नही देना
पानी सा हर एक जाम में, “सागर” मिला ना कर !!

मूल शायर ……
डाँ. नरेश कुमार “सागर”
9897907490

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