किसी से कोई खतरा ही नहीं है

किसी से कोई खतरा ही नहीं है
हमें जीने का चस्का ही नहीं है

लड़ाई है ! ये प्यासों की लड़ाई
यहाँ पानी का झगड़ा ही नहीं है

उसी को इश्क़ का रंग बोलते हैं
जो चढ़ता है उतरता ही नहीं है

उधर जाते हैं सब रस्ते’ उधर से
इधर का कोई रस्ता ही नहीं है

अकेले खुद ही रो लेते है़ं ‘नासिर’
कोई हमसे लिपटता ही नहीं है

– नासिर राव

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