किसी का दिल न दुखाना।

तुम किसी का दिल न दुखाना।
जब से बने हो इन्सान।
भूल गये हो भगवान ।
तुम पढ़ो न वेद पुराण। तुम भूल गये हो अपना ज्ञान।
सभी जीवों में रहता है परमात्मा महान।
तुम किसी का दिल न दुखाना।
अरे! यहां पर आये हो बन कर मेहमान।
करो अपने इष्ट की पहचान ।
व्यवहार करते समय रखो तुम ध्यान।
किसी का दिल न दुखाना , किसी का दिल न दुखाना।
सभी जीवों को एक समान समझना।
तुम किसी का दिल न दुखाना।

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Li.g.86.ayodhoya.nagar.bhopal.pin..462041 फूलचद रजक कवि एवं साहित्यकार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं लेखन, कविता कहानी एवं लेख विगत बीस...
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