May 3, 2017 · तेवरी
Reading time: 1 minute

किसानों की दुर्दशा पर एक तेवरी-

सरकारी कारण लुटौ खूब कृषक कौ धान
रह गयौ बिना रुपैया, धान कौ हाय बुवैया |
दरवाजे पे कृषक के ठाडौ साहूकार
ब्याज के बदले भैया, खोलि लै जावै गैया |
करें खुदकुशी देश के अब तौ रोज किसान
न कोई धीर धरैया , कर्ज में डूबी नैया |
आलू-गेंहू सड़ गये बेमौसम बरसात
कृषक के दैया-दैया, उड़ि रहे प्राण-पपैया |
छीनौ भूमि किसान से, है सरकारी शोर
कृषक के दुःख पर भैया, सेठ की ताताथैया |
+रमेशराज

313 Views
Copy link to share
कवि रमेशराज
273 Posts · 18.9k Views
Follow 5 Followers
परिचय : कवि रमेशराज —————————————————— पूरा नाम-रमेशचन्द्र गुप्त, पिता- लोककवि रामचरन गुप्त, जन्म-15 मार्च 1954,... View full profile
You may also like: