कविता · Reading time: 2 minutes

कौन है सबसे ताकतवर

काली अंधेरी रात, लगती सबसे ताकतवर है
क्यों सूर्य की किरणे उसको पल भर में मिटाती है
फिर मेघराज जब चुनौती देता है सूर्य को
छुप जाता है वो जब बादल ताकत दिखाते है।।

फिर अपनी गर्मी से वो मेघराज को
पिघला देता है यूं कहिए रुला देता है
वो रोना मेघराज का बारिश के रूप में
उसकी कमज़ोरी हमको दिखा देता है।।

आता है जब तेज़ हवा का झौंका
मेघराज को भी हटा देता है
जो सूरज कर नहीं सकता वो काम
लेकिन ये समीर पलभर में कर देता है।।

जब टकराता है ये समीर पहाड़ों से
ये समीर भी हार जाता है उससे
लौटकर वापिस दिशा मोड़ देता है
लेकिन लड़ नहीं पाता है उससे।।

वो अचल है अडिग बरसों से यहीं
लेकिन हार जाता है वो इंसान से
अपनी हिम्मत और हौसलों के बल
इंसान पहुंच जाता है शिखर पर शान से।।

इंसान है दुनिया में बहुत ताकतवर
लेकिन मौत से वो भी हार जाता है
जब होती है मौत किसी अपने की
तो वो भी आखिर टूट जाता है।।

लगता है मौत से ताकतवर कोई नहीं
लेकिन वो भी सबसे ताकतवर है नहीं
जब एक महिला को अपने पति को,
छीनने से वो भी रोक पाई थी नहीं।।

जानते है, ममता से महान कुछ नहीं होता
लेकिन वो भी बेबस हो जाती है, औलाद के लिए
उसकी कमज़ोरी होती है औलाद तो
लालायित रहती है देने को खुशी औलाद के लिए।।

इसका मतलब बच्चे सबसे ताकतवर है
निशा के अंधेरे से, उनको बहुत डर लगता है
रात होते ही सब बच्चे अंधेरे से भागते हैं
रात ही है सबसे ताकतवर, ऐसा लगता है।।

उदय होते ही भास्कर के सुबह,
रात भी मिट जाती है
कौन है सबसे ताकतवर ये बहस,
बस चलती जाती है।।

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