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किताबों सी नहीं होती जिंदगी , असल का अलग ही अंदाज़

कृष्ण मलिक अम्बाला

कृष्ण मलिक अम्बाला

कविता

September 10, 2016

कल्पना में जीकर क्या करेंगे
सपनों का टूटना है दुखों की किताब
किताबों सी नही होती जिंदगी
असल का अलग ही अंदाज़

अच्छे होते है सिद्धांत किताबी बेशक
परन्तु हालातों की अलग है कहानी
बाहरी रूप पर जाने जाते सभी
अंतर्मन की न कभी किसी ने जानी
देखे हालात जब इस जग के
हुई बहुत ही हैरानी
हर कोउ गलतफहमियों में है जी रहा
मजाक सी लगती है सभी की कहानी
फिल्मों को मान लेते है जिंदगी
वैसा बनने की हर किसी ने ठानी
बाद में नोचते हैं बाल वो नादान
जिन्होंने होश खोकर की नादानी

बातों के महल से नहीं चलती सामाजिकता की गाडी
कर्म है असली विचारों का आईना
विश्वास शब्द भी हुआ इतना फीका
जैसे हो मेड इन चाइना
विवेक की ताकत से अपनाओ सिद्धान्त किताबी
न तुम इसे ऐसे ही अपनाना
जल्दबाज़ी में चलकर किताबी उसूलों पर
न पड़ जाये उम्र भर पछताना
सही कहता है गीतों का तराना
जीना तो है उसी का जिसने ये राज जाना
है काम आदमी का
औरों के काम आना

वास्तविकता से रूबरू करवा सकें
लेखनी का हर पल प्रयास
सच में किताबों सी नहीं होती जिंदगी
असल का अलग ही अंदाज़

Author
कृष्ण मलिक अम्बाला
कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर... Read more
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