Skip to content

कितने अरमान दिल में छुपा लाया है

विनोद कुमार दवे

विनोद कुमार दवे

गज़ल/गीतिका

January 7, 2017

कितने अरमान दिल में छुपा लाया हैं,
कोई है शख़्स जो मेरा अपना साया है।
** **
उसकी कमसिन आँखों ने जब से कहा मुझे पागल,
मेरा दिल-ओ-दिमाग बड़े शौक से पगलाया है।
** **
वो जब से रूठ गई है मुझसे मैंने ऐसा देखा है,
मेरे गुलशन का फूल-फूल पत्ता-पत्ता कुम्हलाया हैं।
** **
इतनी नाराजगी मत रख मुझसे मेरे सनम,
दिल भी पूछे मेरा तू अपना है या पराया है।
** **
नज़र नही हटती मेरी तेरे सुंदर सुंदर चेहरे से,
मैं तो तेरा हो चुका जब तूने गले लगाया है।
** **
दिल की हर धड़कन पर तेरे इश्क़ का ख़ुमार है,
आँखों के रस्ते से होकर साँसों में तुझे बसाया है।
** **
तेरे नयनों से मेरे प्यार का रंग कभी न उतरेगा,
तू मेरे रंग में रंगी है जब से तुमको अपनाया है।

Share this:
Author
विनोद कुमार दवे
परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। 4 साझा संकलन प्रकाशित एवं 17 साझा संकलन प्रकाशन... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you