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कितनी करूं पढ़ाई माँ

पहन गले में टाई माँ
कितनी करूं पढ़ाई माँ
जितना बोझा है बस्ते का,
उतना मेरा वजन नहीं.
होम वर्क मिलता है इतना,
होता मुझसे सहन नहीं.
कब आँगन में झूला झूलूँ ,
खेलूँ छुपन छुपाई माँ.
भारी कठिन मुझे लगता है,
सौ में सौ नंबर लाना.
अगर कहीं मैं चूक गया तो,
मुश्किल है नाम लिखाना.
छाँव जरा दे दे बरगद की,
और मुझे अमराई माँ
गया नहीं मैं कब से छत पर,
देख न पाया चन्दा तारे
नहीं सताये कब से मैंने,
बाल सखा वे प्यारे प्यारे
रंग बिरंगी वह पतंग भी,
कब से नहीं उड़ाई माँ

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बसंत कुमार शर्मा
बसंत कुमार शर्मा
जबलपुर
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भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) में , जबलपुर, पश्चिम मध्य रेल पर उप मुख्य परिचालन...