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कितना वो गरीब हुआ करता था

Raj Vig

Raj Vig

कविता

June 10, 2017

गुजरा जब मै उस बस्ती से
जहां वो रहा करता था
रोंगटे मेरे खड़े हो गये
कैसे वो जिया करता था ।

धुंए से भरी झोंपड़ी मे
गिनती का समान हुआ करता था
चूल्हे पे बनी रोटी को
अचार साथ वो खाया करता था ।

ढूंढता हूं उसको हर जगह
जहां वो जाया करता था
न जाने कहां गुम हो गया
दोस्त वो मेरा हुआ करता था ।

दोस्तों की पार्टी को
व्रत है कह कर टाल दिया करता था
रोया था हर दोस्त जब बताया था उसने
कितना वो गरीब हुआ करता था ।।

राज विग

Author
Raj Vig
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