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किंतु गह सद्ज्ञानरूपी लोक लो/ वही तो नवराष्ट्र का उल्लास है

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

मुक्तक

May 4, 2017

रोक सकते हो मुझे, तो रोक लो
बढ़ रहा हूँ, चेतना आलोक लो
काट डालो तुम हमारे अस्त्र सब
किंतु गह सद्ज्ञानरूपी लोक लो

चेतना सद्ज्ञान में ना त्रास है
सो गए तो दीनता औ ह्रास है
बढे जो भी निज हृदय में झाँककर
वही तो नवराष्ट्र का उल्लास है
…………………………………………….

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए”एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

जागा हिंदुस्तान चाहिए कृति के दो मुक्तक
04-05-2017

Author
बृजेश कुमार नायक
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर,... Read more
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