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काश हम सदा रहते बच्चा

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

कविता

October 10, 2017

वो बीता कल कहां गया
ओ बचपन तू लौट के आ
मुझ को उन यादों में बुला।

खेलकूद के कदम घर में रखना
माँ की गोदी में सिर रखना।
माँ का सिर पर हाथ फेरना
अंखियों को निंदिया का घेरना।

सब कुछ ही कितना सुखमय था।
न कोई चिंता न ही भय था।
वो बीता कल कहां गया
ओ बचपन तू लौट के आ
मुझ को उन यादों में बुला।

सैर पे पापा के संग जाना
उछल कूद रस्ते में मचाना
कूदना गिरना चोट लगाना
पापा से पुचकारे जाना

वो सब कुछ था कितना अच्छा
काश हम सदा रहते बच्चा
वो बीता कल कहां गया
ओ बचपन तू लौट के आ
मुझ को उन यादों में बुला।

—-रंजना माथुर दिनांक 10/10/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

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Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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