काश समझता मां को मां !!!

ऐ मां तू तो अजीज है, दवा दुआ ताबीज है।।
नौ महीनों तक रखा गर्भ में, हर मुश्किल में संभाल के।।
आंखें रही प्रतीक्षा में, व्याकुल अपने उस लाल के।।
बाहर आकर जब तेरी , छाती से लगकर मैं रोई।।
मुख में भर दी प्यार का सागर, चैन से फिर जीभर सोई।।
ऐ मां कौन है जो झुठलाए, तेरा त्याग तेरा बलिदान।।
सहनशीलता की प्रतिमा तू, ऐ मां तू सचमुच है महान।।
आज कई माओं की ममता , बिलख-बिलख करती फरियाद।।
काश समझता मां को मां, दुनिया की हर एक औलाद।।
रीता सिन्हा
बेगुसराय, बिहार

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Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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