कविता · Reading time: 1 minute

काश सभी कुछ …

काश सभी कुछ सोचा हो जाता
समझो कितना अच्छा हो जाता

तेरे तसववुर पागल हम रहते
दुनिया को कोई धोखा होजाता

हम जो लिखते राम-कहानी
शायद तुझको फतवा हो जाता

इतनी भी हकीकत ना होती
जितना कहने को रुतबा हो जाता

गर खतों को जला न देते
सुशील बदनाम बुरा हो जाता
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सुशील यादव
न्यू आदर्श नगर दुर्ग, छत्तीसगढ़

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