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*** काश ये बात होती ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

January 23, 2017

कल उनसे हमारी मुलाकात होती मन से मन की कोई बात होती काशआज की ये रात कल की सुहानी शुरुआत होती काश उनसे यूँ ही मुलाकात होती
प्यार में प्यार से प्यार की बात होती
हर जन्म में यूँ ही मिलते रहेंगे और
न जाने क्या-क्या बात होती काश हमारी तुम्हारी ये पहली मुलाकात होती
काश लोगों केलिए यह तेरी-मेरी मुहब्बत जमाने की सबसे अनोखी बात होती यदि कल की वो रात हमारी तुम्हारी शादी की पहली सुहागरात होती काश ये भी ना होता तो हमारी तुम्हारी कुछ ऐसी बात होती जो किसी सुहागरात की रात से भी रंगीन वही रात होती और
सुबह की एक अच्छी सुरुआत होती
काश उनसे वह पहली मुलाकात होती ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more

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