कविता · Reading time: 1 minute

काश मैं लौट सकता?

काश मैं लौट सकता अपने बचपन में
अपनी वय किशोर अबस्था में
अपने स्कूल कालेज पुराने संगी साथियों में
अपनी ऱगीन हंसीन जवानी में
अपनी जड़ों की माटी में
हां लौट सकते हो, महसूस कर सकते हो
आ जाओ ❤️ दिल के वात्सल्य भरे आंगन में
याद कर बुला लो वचपन के निर्मल मन
हो जाओ निर्मल निर्मल
आ जाओ ❤️ दिल की पाठशाला में
मिल लो सहपाठियों से
कर लो पुरानी यादें ताजा
चले आओ स्वछंद ❤️ दिल के कालेज में
मिल लो सहपाठियों से
कर लो पुरानी यादें ताजा
अपनी ऱगीन हंसीन नादानियां
❤️ दिल से याद करते रहोगे
हर उम्र में बचपन
हर क्षण जवान बने रहोगे
उत्साह उमंग से जीते रहोगे

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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