मुक्तक · Reading time: 1 minute

***काश्मीर का मूल्य बहुत है***

पुष्प अपुष्प खिले बहुतेरे, पर गुलाब की महक बहुत है,
भ्रष्ट हुई है सोच हमारी, आज मानवता तंग बहुत है ॥1॥

कलरव करते पक्षी जह-तहँ,पर कोयल की कूक बहुत है,
क्षण-2 बीता जाएँ व्यर्थ में,प्रति क्षण का यहाँ मूल्य बहुत है॥2॥

सोना लो या चाँदी ले लो, आत्मसम्मान का मूल्य बहुत है,
पर्वत जंह-तहँ कितने भी हो, पर गिरराज की शान बहुत है॥3॥

राजा कितना भी हो वीर बहादुर, पर सेना का मूल्य बहुत है,
कितना प्यारा हो पिता पुत्र का, पर माता का मूल्य बहुत है॥4॥

कितना भी पढ़ लो वेद पुराण, पर गीता का ज्ञान बहुत है,
यदि करनी हो आदर्शों की व्याख्या,ईश राम का त्याग बहुत है॥5॥

कितना भी सुख भोगें परवश में, स्वतन्त्रता का सुकून बहुत है
ले गए लूट के इस देश को फिरंगी, पर भारत माँ का मान बहुत है ॥6॥

धप-2 कर लो कितनी भी ढोलक से, पर तबले की तान बहुत है,
पर पीड़ा को समझें हम सब, बस इस जीवन का सार बहुत है, ॥7॥

सप्त नगरियाँ महत्वपूर्ण हैं, पर मथुरा की बात बहुत है,
नटखट बच्चे होते ही हैं, नटखट नंदलाल की बात बहुत है ॥8॥

ड्रैगन कितना भी फुफकारे, भारत की ललकार बहुत है,
विश्व पटल को नाश कराने में, चाइना का माल बहुत है ॥9॥

आतंकी आतंक फैलालें, भारत का सैनिक जांबांज बहुत है,
भारत के लिए काश्मीर का, मूल्य बहुत है मूल्य बहुत है॥10॥

( स्वतन्त्रता दिवस और जन्माष्टमी की शुभ कामनाओं के साथ- कुछ विचार)
###अभिषेक पाराशर###

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