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कारगिल विजय दिवस कविता

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

कविता

July 26, 2017

“कारगिल विजय दिवस”
मापनी-१२२२×४

लगा कर धूल मस्तक पर बहा कर प्रेम की धारा। चला हस्ती मिटाने को भगत आज़ाद सा यारा। वतन पे जाँ फ़िदा कर दे यही ख़्वाहिश निराली है। समर्पण का धरम तुम भी निभाना शौक से न्यारा।

लिए जज़्बा मुहब्बत का, खड़ा सरहद मिटाने को।
वतन काशी वतन काबा वतन पे जाँ लुटाने को।
रखा महफूज़ भारत को लहू अपना बहा करके।
बढ़े जो हाथ उनको काट कर जननी बचाने को।

किया कुर्बान बेटे को तड़प ममता सहा करती।
लिटा कर गोद पूतों को तरसती माँ रहा करती।
लुटा कर जाँ कफ़न ओढ़ा तिरंगा आज वीरों ने।
सुलगती आग चिंगारी नमी बन कर बहा करती।

बचाई शान देकर जान सीमा पर जवानों ने।
बिछा दीं लाश दुश्मन की यहाँ जिंदा जवानों ने।
“अमर ज्योती” सदा जलती दिलाती याद कुर्बानी।
दिखा कर हौसला देखो निशानी दी जवानों ने।

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
महमूरगंज, वाराणसी (उ.प्र.)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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