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कान दीवारों के होते हैं

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

गज़ल/गीतिका

April 20, 2017

बीज वफ़ा के तू बोया कर
देख ग़मों को मत रोया कर

बहुत अहम हैं माँ की दुआएं
उनकी खातिर भी सोचा कर

ग़र खुशियों को जो तू चाहे
दिल औरों से भी जोड़ा कर

मुरझाएँगें पल मे सारे
शाख़ गु़लों के मत तोड़ा कर

हाथ न तेरे ये जल जाएँ
अंगारों से मत खेला कर

आँख उठा कर देख ले हमको
इश्क़ तुम्ही से है समझा कर

बचपन की ग़लती दुहरा कर
याद पुरानी फिर ताजा कर

तड़प रहे हैं कब से “प्रीतम”
रहम तू हम पर भी खाया कर

गिरह–
कान दिवारों के होते हैं
धीरे——धीरे बोला कर

Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
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