Skip to content

कान्हा-व्यथा

Rajeev 'Prakhar'

Rajeev 'Prakhar'

कविता

June 13, 2016

कान्हा बोले यूँ मैया से,
“क्यूँ कलियुग में जाऊँ मैं l
जो माखन अब नहीं है असली,
काहे भोग लगाऊँ मैं”?
कान्हा बोले यूँ मैया से …l

“गऊ माता लाचार बेचारी,
खून के आँसू रोती है l
थनों में उसके, दूध की आमद,
इन्जेक्शन से होती है l
मुन्नी व शीला के युग में,
मुरली किसे सुनाऊँ मैं ?
जो माखन अब नहीं है असली,
काहे भोग लगाऊँ मैं” ?
कान्हा बोले यूँ मैया से …l

“द्वापर में तो नाग कालिया,
साफ़-साफ़ दिख जाता था l
इसीलिए तो मैंने उसको,
आसानी से नाथा था l
अब नागों ने बदले चोले,
कैसे उन तक जाऊँ मैं ?
जो माखन अब नहीं है असली,
काहे भोग लगाऊँ मैं”?
कान्हा बोले यूँ मैया से …l

“मामा कंस ने मारी कन्या,
दुनियां वाले कहते हैं l
आज देश में और भी मामा,
ऊँचे-ऊँचे रहते हैं l
मामी को भी कम न संमझो,
सबका नाच दिखाऊँ मैं l
जो माखन अब नहीं है असली,
काहे भोग लगाऊँ मैं”?
कान्हा बोले यूँ मैया से …l

“बदल चुकी हैं आज गोपियाँ,
इक-दूजे से जलती हैं l
तब शर्म ओढ़कर चलती थीं,
अब शर्म छोड़कर चलती हैं l
तन पे शर्म-हया का टोटा,
अब क्या वस्त्र चुराऊँ मैं l
जो माखन अब नहीं है असली,
काहे भोग लगाऊँ मैं”?
कान्हा बोले यूँ मैया से…l

(सर्वाधिकार सुरक्षित)

– राजीव ‘प्रखर’
मुरादाबाद (उ. प्र.)
मो. 8941912642

Share this:
Author
Rajeev 'Prakhar'
I am Rajeev 'Prakhar' active in the field of Kavita.

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you