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कान्हा तुम आ फिर से जाना

डॉ मधु त्रिवेदी

डॉ मधु त्रिवेदी

कविता

October 7, 2016

कान्हा तुम आ फिर से जाना
चित्त चुरा कर फिर ले जाना

बाँसुरी बजा कर मधुर मधुर
उर में आज समाते जाना

बन राधा प्रीत तुझे करती
लौं प्रेम की जलाये जाना

प्रेम दिवानी मीरा जैसी मैं
दर्शन मुझको तुम दे जाना

मार कंकड़ मटके फोड़ यहाँ
माखन मिश्री चुराते जाना

राज्य करे नर असुर यहाँ
उन असुरों को मारे जाना

भाँति -भाँति की गोपियाँ यहाँ
दिल में उनके बसते जाना

दुष्टों से व्याकुल जनजीवन
प्राण कंसों के हरते जाना

डॉ मधु त्रिवेदी

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डॉ मधु त्रिवेदी
डॉ मधु त्रिवेदी प्राचार्या शान्ति निकेतन कालेज आगरा स्वर्गविभा आन लाइन पत्रिका अटूट बन्धन आफ लाइन पत्रिका झकास डॉट काम जय विजय साहित्य पीडिया होप्स आन लाइन पत्रिका हिलव्यू (जयपुर )सान्ध्य दैनिक (भोपाल ) सच हौसला अखबार लोकजंग एवं ट्र... Read more
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