कानूनी साक्षरता

कानूनी साक्षरता
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मनीभाई रचित ?
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अन्याय जब हद से बढ़ जाए ,
बेईमानी सर पे चढ़ जाए ।
समाज में निज मान पाने को
जो अपने हक पे लड़ जाए ।
आज है जिसकी आवश्यकता ,
वो है, वो है कानूनी साक्षरता ।।

न्याय सभी के लिए, चाहे अज्ञानी निर्धन ।
बिन इसके कैसे ? हो सुरक्षित जनजीवन ।
सही न्याय मिले,शीघ्र न्याय मिले ,
आज विकसित हो जिससे मानवता ।
वो है, वो है कानूनी साक्षरता ।।

कानून के आंखे फैसला करें समभाव से ।
निष्पक्षता बनी रहे निर्णय ना हो दबाव से ।
लोक अदालत हो ,सच्चा वकालत हो ,
असहाय को जो देगी, शीघ्र सहायता।
वो है, वो है कानूनी साक्षरता ।।
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