कविता · Reading time: 1 minute

कांटों के जंगल

हम अक्सर ही
पाल लेते हैं
गलतफहमियां दिलों में
बो लेते हैं कांटे
जिस जगह उगाने होते हैं
फूल
इसका नतीजा यह होता है कि
फूलों के उपवन की जगह
कांटों के जंगल उगते हैं जो
एक भी फूल को
अपने बीच
उगने की
रहने की या
पनपने की जगह नहीं देते
कांटों के जंगल जब घने होकर
फैलते जाते हैं तो
चाहे इनमें आग लगाओ या
काटकर इन्हें साफ करने का बीड़ा उठाओ पर
यह जड़ से खत्म फिर कहां हो पाते हैं
फूलों के दिलों को तो यह अपने
पैरों तले रौंदते ही जाते हैं या
उन्हें लहूलुहान कर उम्र भर जख्म पर जख्म दिये
जाते हैं।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) – 202001

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