कविता · Reading time: 2 minutes

कांग्रेस!! “भूत-बर्तमान-भविष्य”!!

सौ सालों से अधिक का इतिहास है जिसका,
कांग्रेस नाम है उसका!
एक फिरंगी ने जिसे जन्म दिया है,
एक फिरंगन के हाथों में दम तोड रही है,
आज मरी-अब मरी, इस तरह घिसट रही है,
सांसें इसकी कब थम जाएं,अटक-अटक कर चल रही है।
सौ सालों से चली आ रही,
आज मरणासन्न हुई पड़ी हैं!

अपने यौवन में जिसने,
देश भक्ति का भाव भरा था,
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई में,
भाई होने का अहसास करा था,
जात-पात से ऊपर उठकर,
सब धर्मों को संगठित कराकर,
पराधिनता से विचलित होकर,
स्वाधिनता का बोध करा था।
आज वही होकर विहल, करुणक्रंदन कर रही है,
सौ सालों से चली आ रही,
आज मरणासन्न हुई पड़ी है।

वर्षों-वर्षों तक जिसने संघर्ष किया,
कितने प्राणों का उत्कर्ष किया,
ऐसा सपना जो, अपने भारत का था,
हर भारतीय के मन में जगाया था,
अब उसी के जीवन में ही,
ऐसा एक घाव किया है,
जिससे आहत होकर वह आज रुदन करते दिख रही है,
सौ सालों से चली आ रही,
आज मरणासन्न हुई पड़ी है।

बाल-लाल-पाल, से लेकर,
सुभाष-गांधी-पटेल से होकर,
नेहरू-कामराज-संजीवा रेड्डी तक,
इन्दिरा-शास्त्री, देवकांत बरुआ तक,
इसने अपना जीवन दिया,
फिर युग ऐसा भी आया,
राजीव-नरसिम्हां, केसरी और सोनिया,
इन संग इसने अपना कदम बढ़ाया,
पर अब इस पर विराम लग रहा,
सोनिया-राहुल, राहुल सोनिया,
यह सब क्या नाटक चल रहा,
इसमें ही यह उलझ कर कह रही है,
सौ सालों से अधिक का इतिहास है जिसका,
अब अपने ही अस्तीत्व को तरस रही है,
आज वह कांग्रेस स्वंय में, मरणासन्न होकर सिसक रही है।

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